आज पुराने एल्बम के उन तस्वीरों ने

मुझे आवाज दी है।

नवल युगल का जीवन,

प्रणय नाद से गुंजित तन-मन ।

अलसायी पलकें उनींदी आँखें,

जिनमें बसे अल्हड़ से अतरंगी सपने ।

इन सब से इठलाता-झूमता तन बदन ।

यौवन की अठखेलियाँ,

अणु अणु मधु की प्याली

मधुर मनोहर मदन -रति हो आली।

पिय के आलिंगन में समायी,

मौन समर्पण की प्रतिध्वनि से

गुंजित होता हर कोना

चार दशक के बाद भी

उन तस्वीरों से 

आज भी स्प॔दित होता है मन।

प्रबल सशक्त भुजपाश में

आज भी बँध बँध जाता है ,

तन-मन और यौवन ।

मधुर पलों का मौन समर्पण ,,,, ।