केवल दोयम दर्जे की कविताएँ
हुईं प्रकाशित पुस्तकों में,
अखबारों, संग्रहों में
पढ़ी गईं सम्मेलनों में;
प्रथम दर्जे के कवि कभी
कवि कहलाए ही नहीं!
प्रेमी के अधरों ने,
प्रेमिका के अधरों पर लिखी
प्रथम दर्जे की प्रेम कविता,
कृषक ने कुदाल से उगाई,
धरती की छाती पर, हरी,
प्रथम दर्जे की श्रम कविता
माँ ने लिखी,आखिरी रोटी से
बेटे की थाली में,
प्रथम दर्जे की स्नेह कविता
सिपाही ने लोहे से उकेरी
अरि-उर पर, लाल,
प्रथम दर्जे की विजय कविता..
जल्लाद ने गोल की फुट भर रस्सी
और गाँठ लगा कर लिखी
प्रथम दर्जे की कर्म कविता
धरा फाड़,बादलों तक पहुँची,
प्रकृति की,
प्रथम दर्जे की श्रृंगार कविता
खनिज पोस कर गर्भ में
धरा ने संचित की
प्रथम दर्जे की वैभव कविता
गृहिणियों ने पुर्जे में
लिख भेजी किरानों को
प्रथम दर्जे की वाणिज्य कविता
अस्थियां बन नदी में
मछलियों तक पहुँची
प्रथम दर्जे की जीवन कविता
दैनिक प्रकाशित हुईं
समाजों में, व्यवहारों में
झरनों में, पहाड़ों में,
घरानों में, वीरानों में,
सर्वविदित, सर्वकथित,
प्रथम दर्जे की अगणित कविताएँ
जबकि प्रथम दर्जे के कवि कभी
कवि कहलाए ही नहीं!
~
अमरशक्ति


