कोई नहीं है सुन रहा,
मैं मूक हूँ, मैं लापता
है कौन मुझको पूछता
है किससे मेरा राब्ता
वो आसमान ताकते
मैं हूँ जमीन पर गिरा
मेरे सवाल कौन से
है किससे मेरा सिलसिला
है तुमको रोटियाँ मिली
है मुझको पूछो क्या मिला
मेरे घरों को रौंदता
है गाड़ियों का कारवाँ
ये मुझसे क्यूँ है दुश्मनी?
ये मुझसे कैसा है गिला?
नज़र उठा,बता ज़रा
ये भीड़ में मैं हूँ कहाँ
कहाँ मेरे नसीब की
वो चंद रोटियाँ गई
है आसमान खा गया
या है जमीं निगल गई
मैं किससे जा के लूँ खबर
है किससे मेरी दोस्ती
क्यूँ मेरा सिर्फ हादसा
क्यूँ मेरी सिर्फ त्रासदी
ये कौन सा विधान है
ये क्यूँ गले में जान है
ये कैसे देश है बडा़?
ये बनता क्यूँ महान है?
मैं चीख के हूँ पूछता,
क्या मोल मेरी जान का?
नज़र उठा,बता ज़रा
ये भीड़ में मैं हूँ कहाँ?
-
अमरशक्ति

