सलिल चल, मनोज ने सलिल के कंधे पर हाथ रखा तो सलिल चौक उठा.
बोला - "हां "
"क्या बात है? तू सुबह से परेशान लग रहा है"-मनोज बोला
"नहीं कुछ नहीं" - सलिल बोला
सुबह to office की परेशानी बोल कर और झूठी मुस्कान से पूर्वा को बहला आया था, पर ऐसा कब तब चलेगा? कभी ना कभी तो ये बात सामने आयेगी ही. जब जो होगा देखा जाएगा- खाते हुए सलिल ने सोचा.
"बरखा रानी जम के बरसो, हमारा अनिल शर्मा रहा है". ऐसा कह कर मैं और पूर्वा, सुबह से अनिल को परेशान कर रहे थे.


