तुझे देखू शाम ओ सहर

खो जाऊँ मदमस्त नैनों में

चूम के रस भरे होठों को

छुप जाऊँ तेरी बाहों में..!


तेरे भीने गेसुओं की खुशबु

सुलझाऊँ फिर प्यार से

दिल कहाँ भरता है मेरा

दीवानी तेरे दीदार से..!!


तेरे सुर्ख नर्म गालों को

दिन रात सहलाता रहूं

तेरे उरोजो़ के उभार को

प्यार से दुलारता रहूं..!!


तेरे बदन की खुशबु

मदहोश मुझे करती है

तुझ में मैं સમા जाऊँ

ये जोश मुझमें भरती है


जब हम तुम मिल जाते हैं

फूल दिल के खिल जाते हैं

पतझड में बहार आती है..

दिन प्यारी रातें रंगीन कर जाती है..!!


© Vaisshali