हसता भी है, हसाता भी है.
रोता भी है, रूलाता भी है.
चाहे कैसा भी है मेरा भाई
पर जान से ज्यादा मानता भी है.....
दिलका साफ है, पर दिल की बाते बताता नही.
कितना लगाव है मुझसे ये जताता नही.
झिकर भी करता है अपने दिल की बातों का,
दर्द भी भुल जाता है मेरे लिए अपनी जजबातो का.
उसकी मुस्कन ही काफी है मेरे लिए,
गालियाँ भी मेरे मुँ मे वो प्यार है उसके लिए.
झिकर इतना काफी नहीं है तेरा,
कैसा भी है लेकिन भाई है तु मेरा.............


