तोड़ कर लॉकडाउन के नियम, घर से ही निकला था,

आ गया वो परिंदा सामने, जिसे शहरों में न देखा था,

देख मुझे वो थम गया, पर थमना ना उसे था,

भर उड़ान आसमान में वो, क्रोध में मुझसे  कह गया,

वृक्ष काट आशियाना, हमारा तोड़ा है,

भर गुब्बार धुएँ का तुमने, आसमान में छोड़ा है,

पानी भी गन्दा कर,नदियों में घोला है,

लालच में आ इंसान ने, गला प्रकृत्ति का घोंटा है.,

सुन शब्द स्तब्ध मैं रह गया,

भूत देख भविष्य को लेकर डर गया,

क्या वाकई इंसान ने गला प्रकृत्ति का  घोट दिया? ....