क्या है अज़ब सा ये रिश्ता जो तुझ बिन रह न पाता हूँ।

मैं लिखता हूँ जब खुद को नाम तेरा ही पाता हूँ।।

तन्हाइयों में मैं तो गीत तेरे ही गाता हूँ।

जब भी लिखता हूँ कोई ग़ज़ल उसमे तुझको ही पाता हूँ।।-वैभव रश्मि वर्मा