बड़ा वीरान है मर भी, बड़ा वीरान है घर भी।

जहाँ लोगो के मेले थे, वहां अब सब अकेले है।।

कोई पूछे न आ कर भी, जिया कैसे तू मर कर भी।

लिए हाथों में मद बैठा, तेरे जीने का है कैसा लहज़ा।।-वैभव रश्मि वर्मा