बड़े वादों का दौर चला इस इश्क़ में वैभव।
वक़्त निभाने का आया तो साथ कोई नही।।
दिल लगाने को हाज़िर रहा ज़माना सामने।
लगाने को मरहम मांगा तो साथ कोई नही।।
क्यों करें यक़ीन उसकी बातों पर अब ।
वैभव बने जो हमसफ़र अब साथ कोई नही।।-VAIBHAV RASHMI VERMA


बड़े वादों का दौर चला इस इश्क़ में वैभव।
वक़्त निभाने का आया तो साथ कोई नही।।
दिल लगाने को हाज़िर रहा ज़माना सामने।
लगाने को मरहम मांगा तो साथ कोई नही।।
क्यों करें यक़ीन उसकी बातों पर अब ।
वैभव बने जो हमसफ़र अब साथ कोई नही।।-VAIBHAV RASHMI VERMA