मेरी मोहब्बत को तुम कागज़ो में ढूँढते रहे,

नज़रें उठा के देखा न कभी।


चाहत रही साथ मेरे चलने की तुम्हें,

पर हाथों को बढ़ाया न कभी।।


अब और वज़ह क्या बताये दूरियों की,

हमने तो पास तुम्हे पाया न कभी।


मेरी मोहब्बत को तुम कागज़ो में ढूँढते रहे,

नज़रें उठा के देखा न कभी।।-VAIBHAV RASHMI VERMA