कई दफ़ा सुने हैं, खुश थे हम तेरे मिलने से पहले भी
जा, मचान पर रख दे, उन लम्हों का पिटारा ना खोल
मैंने, परीयां निकलती देखी हैं, दुआओं के लिहाफ से
सुन तो सही, मेरे अल्फाज़ों को इतना सस्ता ना तोल
जुगनू संग ले चल मुसाफिर, रोशनी तेरे काम आएगी
मैं तेरे पंखों के साये में चलूंगी, ए हमनवां नां ना बोल
दौर-ए-जाम बेकुबूल न कर सा़की, मैं तेरे सजदे में हूँ
मयकशी को रुसवा न कर, तूं शराब मैं जहर ना घोल
मोती सा चमकी शबनम,, अश्क जो पलकों पे मचले
पीङ अब सुकूं होने को है, तूं बस जरा दर्द और घोल
मेरी शर्म की धानी चुनर, तेरी तोहमतों का रंग गेरुआ
रंग को रंग ही रहने दे यारा, इसमें तो बेहयाई ना रोल
©उत्तम दिनोदिया
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**चित्र साभार - गूगल


