(1) सफलता का अपना सुख, विफलता का अपना दुःख. पर दोनों के मझधार में फंसी जिंदगी, उफ़ अजीब सी घुटन है..   (2) किल्लत के दौर में सोचता हूँ, ईमान बेच दू अपना I कोई खरीदार, नहीं बाजार में II