कॉलेज के दिन, हाथ में कलम, आखों में सपने, सुनता था कलम के धार के किस्से, सोचने लगा इस धार से बदलाव लाऊंगा, पत्रकार बन बैठा, अब समझ में आया कितना बेवकूफ था मैं.