सुना है सब जा रहे हैं,
मोक्ष की तलाश में,
तुम्हारी गलियों से चलकर,
मेरे शहर के उस घाट तक।

चलते चलते कहा जाओगे,
तुम भी तो यहीं आओगे,
खुद अपनी गलियों से चलकर,
फिर लौट के कैसे जाओगे?

उस दिन वो महाकुंभ होगा,
जब गंगा का सागर से मिलन होगा,
उससे ज़्यादा खूबसूरत कौनसा संगम होगा?

इश्क़ अगर रूहानी है तो प्रेम ही मोक्ष होगा,
इश्क़ अगर रूहानी है तो प्रेम ही मोक्ष होगा।

-UKWrites