सुना मैने..

कि वो बोल रही थी..

अंजान थी.. 

पर लब खोल रही थी.. 

यों तो इक अरसे से परदे में थी.. 

इस मर्तबा मेरे साये से कुछ.. 

बोल रही थी.. 

सुना मैने ।।


अल्फ़ाज कब साथ देते हैं हर वक़्त .. 

निगाहे जो पढ़ रही थी.. 

वो अनकहा शायद.. 

सुना मैने ।।


बस मोड़ था मंजिल से पहला कोई.. 

वो सफर में दुआ बोल रही थी..

सब सजदे में थे खुदा के..

वो खुद की तलाश वाली.. 

शायद पता कुछ और..

बोल रही थी ..

सुना मैने ।।