उसे लगता है हम बिखर जाएंगे ,
इश्क़ का सदमा हम कहाँ सह पाएंगे ,
कौन उसे अब ये बताये ,
कि आज पतझड़ है तो क्या बहारों के मौसम फिर से आएँगे,
उसकी झूठी दलीले सुनेगा कौन ,
एहसासों के सच्चे वकील तो हम लाएंगे ,
हम पछताए गर इश्क़ करके , वो इश्क़ ना करके पछताएंगे ,
हमें बिखरना भी होगा तो किसी के गम में नहीं ,
खुदी की ज़द में बिखर जाएंगे |
उत्कर्ष

