तू जो मुझसे इश्क़ करती तो जानती
तेरा नाम लिखते ही ये कलम हाथ से छूट जाती है,
क्या करूँ तेरी याद ही मुझे कुछ इस कदर आती है ,
झूठी मोहोब्बत का एहसास तो शहर में सरेआम बिकता है ,
सच्ची मोहोब्बत करने वाला कोई मिल जाये वो होता फरिश्ता है ,
मछली कांटे में फंसने के बाद खूब तड़पती होगी ,
बस वही तड़पना मुझे तेरी याद में हर रोज़ पड़ता है ,
कि ज़िक्र जब भी कोई मुझसे तेरा करता है ,
बस वही एक रिश्ता हमारा याद रखता है ,
उनसे भी कुछ कह पाता नहीं मैं ,
क्यूंकि हमारा रिश्ता है क्या ये तो खुद भी समझ पाता नहीं मैं ,
काश तू भी मुझे कभी अपना मानती ,
खैर तू जो मुझसे इश्क़ करती तो जानती |
उत्कर्ष

