
पढ़े - लिखे भी यहाँ अनपढ़ हैं ,
जगह - जगह बिखरे पड़े कमज़ोर विचारों के गढ़ हैं,
जहां काम नहीं लोगों का उपनाम देखा जाएगा ,
वहां हुनर होते हुए भी कोई कुछ ना कर पाएगा ,
यहाँ लोगों को अपनी जाति का गुरूर है ,
जो नहीं जन्मे उनकी जाति में ना जाने उनका क्या कुसूर है ,
ये भी तो देश की समस्याएं हैं ,
कि हमारे यहाँ जातियों में भी विभिन्ताएं हैं ,
जनम के साथ ही यहाँ लोग छांटे जाते हैं ,
घर , गांव , ज़मीन ऐसे ही बांटें जाते हैं ,
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