जीवन के ये लम्हे यूँही गुज़रत जाएंगे,
हम क्या लेकर आये थे और क्या लेकर जायेंगे,
है साथ यहाँ जिनका बस वही संग रह जाएंगे,
वो यादें वो खुशियां बस यही हम छोड़जायेंगे...
मुद्दतों रोया मैं जो ना मिला उसके लिए,
पर जब मिला तो कोई साथ ना रहा बांटने के लिए,
बस यही ज़िन्दग की मेरी कहानी रही,
जब मिली फुर्सत इस भाग दौड़से तो जवानी ना रही..
कुछ लोग साथ चले जो उन्हें नए हमसफ़ मिल गये,
हमे सफ़रपे आगे बढे तो कुछ यार पीछे छूट गये,
ज़मान की हमसे कभी पटती नहीं,
या यूँ कहे की हमने ज़मानेकी कभी सुनी नहीं...
बस अब और किसी शुबा में नहीं है पड़न,
कल की कौन देखे हमे तो आज को है जीना,
ये दुनिया बड़ीअजीब भँवर सी है उत्कर्ष,
यहाँ हर मोड हर पल पे चलता कोई कशमकश...
-उत्कर्ष भास्कर


