कुछ कहते हैं, इश्क़

में नशा होता है,

किसी के लिए तो, इश्क़

सज़ा भी होता है,

जब इतनी बुरी है ये इश्क़, 

 तो क्यूँ तू इसमें फ़नाह होता है|


आशिक़ कहते हैं, इश्क़  

में नींद नहीं आती,

दीवानों के लिए तो, इश्क़

ज़िन्दगी का सबब बन जाती,

जितने लोग उतनी बातें, ऐ इश्क़,

पर तेरे चरचे हर जुबान पे होति|


किसी के लिए है, इश्क़

मक्का और मथुरा यूँ,   

कोई कहे है, इश्क़

में रब मिल जाता यूँ,

कोई ना जाने तेरा मज़हब, ऐ इश्क़,

लेकिन हर पंथ में तेरा ज़िक्र क्यूँ|


इश्क़ तेरे उल्फत से,

ना जाने कितने बर्बाद हुए,

कुछ पत्थर से मारे गये,

कुछ ज़िंदा ही चुनवाए गये,

फिर भी तेरी हसरत में, ऐ इश्क़,

कुछ चौहाण हुए, कुछ महिवाल हुए|


इश्क़ तेरे कदरदानों की

फेहरिश्त बड़ी लम्बी है, 

तुझपे कुर्बां होने वालो की

मज़ारे भी खूब सजती हैं, 

मेरी भी एक ख्वाइश, ऐ इश्क़,

आशिक़ी का मेरे भी, तेरे किस्सों में नाम रहे|


- उत्कर्ष भास्कर