एक लडकी..... एक लडकी..... जिसका बचपन ही जवानी में तबदील हो जाता है उसकी खुशियों का सुरज इस समाज के अंधकारो में ही गुम हो जाता है..; गुडियो के उमर में कई अनचाहे संबंधों से उसका जीवन ग्रस्त हो जाता है; अपने जीवन का हर पल एक पीढी के नाम कर उसका समय ना जाने कहाँ व्यस्त हो जाता है; उडती पतंगो की वायु है वो फिर क्यों उसका जीवन पुरुषअंह से नष्ट हो जाता है..; एक लडकी ही है जिसका बचपन ना जाने कब जवान हो जाता है; इस शोर भरी जिंदगी में उसकी ध्वनि का सुर अनसुना गीत हो जाता है;. एक लडकी.... जिसका बचपन ही जवानी में  तबदील हो जाता है...