
सत्ताधीशों को भाते हैं बस
अंधे. गूंगे औ बहरे किरदार
स्वविवेकी से उन्हें हिलता
दिखता सत्ता का आधार
सत्ताधीशों को सहन नहीं
कोई करे कमियों पर बात
श्लाघा उनकी इतनी के हर
महफिल झूमे उनके साथ
चापलूसों
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सत्ताधीशों को भाते हैं बस
अंधे. गूंगे औ बहरे किरदार
स्वविवेकी से उन्हें हिलता
दिखता सत्ता का आधार
सत्ताधीशों को सहन नहीं
कोई करे कमियों पर बात
श्लाघा उनकी इतनी के हर
महफिल झूमे उनके साथ
चापलूसों