इस समय प्रेम
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प्रेम मैंने किया,
हर उस आह को,उस कराह को,
जो निकली और खो गई..
प्रेम मैंने किया,
उन सपनों को,
जो टूटते चले गए..
उन सिसकियों को,
जो कभी सुनी न जा सकीं..
प्रेम मैंने किया,
उन हौसलों को,
जो हार गए..
उन उम्मीदों को,
जो कभी खत्म न हुईं..
प्रेम मैंने किया,
पानी को, पहाड़ों को, पेड़ों को,
अंधेरे में जगमग जुगनुओं को..
प्रेम मैंने किया,
हवाओं से लड़ते चिरागों को..
इस दुनिया से, इस समय में,
जहां और जब..
प्रेम करना..
सबसे बड़ा अपराध है..
प्रेम मैंने किया..!
-- डॉ उषा कुमारी

