बजट है कि क़यामत है,

सांस भी ले लें तो इनायत है,

लगाकर सरचार्ज पर सरचार्ज,

कहते हैं रियायत है ,

अब क्या कहना सुनना बजट पर,

आफ़त भी कहती है कि आफ़त है।