कूटने दो इन बच्चों को छोटी -छोटी ओखलियों में मीठी -मीठी कविताएँ शायद ये कड़वी दुनिया शक्कर पारे सी हो जाए। पीसने दो इन बच्चों को कल्पनाओं के सिलबट्टे पर भोली -भोली कहानियाँ शायद चालाक सी ये दुनिया कुछ बच्चों सी बन जाए !!