।। चल उड़ान भरे ।।



लोग क्या कहेंगे,

लोग क्या सोचेंगे,

भला, कब तक हम यही सोचते रहेंगे,

निकल बाहर इस सोच के पिंजरे से,

आ, चल उड़ान भरे।


कोई मुझ पर हंस न दे,

तो, कोई मज़ाक न बना दे,

कब तक इन बातों से घबराये,

निकल बाहर इस हिचकिचाहट के पिंजरे से,

आ, चल उड़ान भरे।


चल अपने बनाएं रास्ते पर,

जहां अनदेखा सबको करते चलेंगे,

(कुछ तो लोग कहेंगे,

लोगो का तो काम ही है कहना),

यही सोच आगे बढ़ते चलेंगे,

सपनो की उड़ान भरेंगे,

आ चल यारा आज एक नई उड़ान भरे,

आ, चल खुले आसमा में उड़े,

आ, चल साहस से उड़े,

आ, चल उड़ान भरे,

चल उड़ान भरे।।

~usha fuliya✍️