आँखों में पतझड़ मत देना, पत्ता-पत्ता झर जाऊँ ।
ऐसा भी सावन क्या देना, मैं अंदर तक भर जाऊँ ।
यदि देना है तो मुझको ये, एक वचन देते जाना...
तुम इतना नाराज न होना, मैं पल भर में मर जाऊँ...।।
राहुल द्विवेदी 'स्मित'


आँखों में पतझड़ मत देना, पत्ता-पत्ता झर जाऊँ ।
ऐसा भी सावन क्या देना, मैं अंदर तक भर जाऊँ ।
यदि देना है तो मुझको ये, एक वचन देते जाना...
तुम इतना नाराज न होना, मैं पल भर में मर जाऊँ...।।
राहुल द्विवेदी 'स्मित'