सब समझता है मगर सुनते नही है
ये दिल के अरमान सुलझते नही है
सूरज ढल चुका, रात ने दस्तक दी
बस इंतजार करते है, समझते नही है
ऐसा नही है कि हार जीत जानते नही है
खत्म हुआ सबकुछ पर मानते नही है
परवाने है, मनमाने है
शम्मा बुझ चुकी,पर जलते नही है
#unmeshmohitkar
