प्रियतमे !!!!
याद है मुझको, हर वो पल
जब तुम थी , न थी , न हो
फिरभी तुम मेरा जीवन थी , है , हो ....... !!!!
याद है मुझको , हर वो पल
जब रश्मिरथी की प्रथम किरणों संग
तेरी बोझल पलकों को अपलक देखा करता था
और कोकिला वाणी को सुन प्रमादित होता था
पुलकित ह्रदय ले इस प्राकृत सरोवर का
कलरव का , नियति तांडव का , मैं कृतार्थ होता था ...... !!!!
याद है मुझको , हर वो पल
जब ह्रदय व्यथित ले , शीथल पथिक सा
में भवन आता था , तेरे अंचल को पाता
और स्वर्ण रेखाओं सम भविष्य का
ताना बाना बुन स्वस्थ मन ले सो पता था
और उषा की किरणों के आते यह पथिक फिर
उस अनिश्चित पथ पर युद्ध करनें जाता था .......... !!!!
याद है मुझको , हर वो पल
तेरा मुस्काना , जैसे मेरा जीवन
तेरा इठलाना , जैसे मेरी कल्पना
तेरा गुस्साना , जैसे मेरा काल ग्रास
तेरा रूठना , जैसे कुहरे की धूप
और तेरा मान जाना , मोक्ष सम ...... !!!!
याद है मुझको , हर वो पल
मानो कलि की कालिका
बिछा रही हो हो माया जाल
और चारा सा तेरा अल्हर्पण
मोह पाश में दिग्भ्रमित हुआ सा
उस पथ को जाता था
जहाँ निशा ही दिवा हुई हो
और दिवा है चिर निःशब्द
याद है मुझको , हर वो पल
वो दावानल लील रहा था
मेरे जीवन का जीवन ......... !!!!
याद है मुझको, हर वो पल
वो तेरा मुस्काना, इठलाना,
गुस्साना, रूठना और मान जाना
वो मेरा जीवन था , है , होगा ...... !!!!
याद है मुझको , हर वो पल
और आश लिए नव सूर्य
हर प्रातः मैं देखा करता हूँ ..... !!!!