मेरी  धरती मेरा अम्बर मुझे मेरा चमन देना  मुझे फिर से जो तू भेजे मुझे ये ही वतन  देना  इसी मिट्टी मे फिर खेलूं इसी मिट्टी पर मिट जाऊं  सांसें जब भी निकले मरूं जब भी तिरंगा ही कफन देना