ये तन्हाई मेरे साथ शायद उम्र भर चले मुमकिन है कि ये मेरी चिता के साथ ही जले जो भी मिला, सबको भुलाना मुनासिब होगा जिसे याद रख पाते, उसी शख्स से नही मिले अब तो कोई गहरा जख्म भी नहीं सताता मेरे साथ चलते हैं दर्दों के कई और सिलसिले अब सुकून की झोंपड़ी में जीना जरूरी है ढह गये हैं अब उम्मीदों के सब जादुई किले उन ख्वाबों को मजबूरन दफनाना पड़ा जो इन बेरुख खुश्क आंखों में हर रोज पले चंद लम्हों में ही वो फूट गए बड़े शौक से बनाये थे मोहब्बत के बुलबुले । मैं कब तक दूर करता रहूंगा इन्हें जिंदगी अभी बाकी है तुझसे मेरे कई गिले