उठो क्रांतिवीरों ! वतन अब पुकारे

जड़ता को तोड़ो इंकलाब के सहारे

तुम खुद उठ पड़े तो जमाना जगेगा

बड़े गौर से तेरा हर फसाना सुनेगा

जनता का तब हौसला भी बढ़ेगा

बदलो सियासत करके यत्न सारे..

उठो...


अटकना नहीं है अब वादों में तुमको

हुंकार भरकर दिखा दो यह सब को

तकदीर का फैसला तुम खुद करोगे

तस्वीर इस मुल्क की भी बदलोगे

अपने शक्ति प्रदर्शन से हिला दो इदारे

उठो...


सब जननायकों के कथन याद रखो

बिस्मिल.भगत की कसक याद रखो

समझते तुम्हें हैं जो शय मार्ग विचलित

भुजबल की झांकी दिखा दो सभी को

संघर्षों से खुलते हैं सत्ता के द्वार सारे

उठो...


सफलता तुम्हारा वरण तय करेगी

करवट पर दुनिया तुम्हारी मुड़ेगी

एकजुटता से ही दूर होंगे क्लेश सारे

लक्ष्य पर जो टिके नैन दोनों तुम्हारे

तब मुट्ठी में होगी सियासत तुम्हारे

उठो...