दिल्ली की दहलीज पर सौ दिन

से डटे हैं देश के लाखों किसान


फिर भी उन पर ध्यान नहीं दे रहे

राजनीति के तथाकथित भगवान


दिल पर रखकर हाथ कीजिए

लोकतंत्र की दशाओं पे विचार


देश की राजनीति में क्यों हो गई

धन्नासेठों औ दागियों की भरमार


जब संसद औ विधानसभाओं में

पहुंचेंगे नहीं मजदूर औ किसान


ऐसे में फिर भला कौन करेगा 

किसानों. मजदूरों का कल्याण


चुनाव सुधार के नाम पर चल

रही सत्ताधीशों की मनमानी


गरीबों औ मजलूमों के लिए सभी

चुनाव बन गए हैं ख्वाब आसमानी