स्वप्न और हर इंसान का है

चोली दामन जैसा साथ


स्वप्नों के पीछे दौड़ मानव 

करता रहा सतत विकास


स्वप्नों की उड़ान ही मनु

को कर देती है बेचैन


जब सपने होते साकार तो

मानव मन को मिलता चैन


स्वप्नों के पीछे भागकर मनु

ने किए हैं आविष्कार अनेक


तकनीकी बदलाव में स्वप्नों

की भूमिका रहती है विशेष


स्वप्नों की दुनिया भी वाकई

होती है बड़ी अजीबोगरीब


स्वप्न जिनके पूरे हो सके वो

इंसान होते हैं खुशनसीब


जब मन में खास जुनून हो तो 

स्वप्न होते हैं सभी साकार


लक्ष्य प्राप्ति के लिए होती है

श्रम औ एकाग्रता की दरकार


वैसे सोते समय भी मनुष्य

सब देखते हैं स्वप्न अनेक


मनोवैज्ञानिक की राय में वे

उलझनों का फल विशेष


जो सचमुच आपको हो पद

धन और प्रतिष्ठा की दरकार 


स्वप्न देखिये खुली आंखों से

श्रम. एकाग्रता से कीजै साकार