सवाल दर सवाल कर

प्रगति का हिसाब कर


लोक को बताता चल

तंत्र को जगाता चल


सवाल होंगे जब मुखर

तो लोकतंत्र होगा प्रखर


सवाल पूछने से जो डरा

संशय से सदा रहा भरा


सवालों से ही मिलते रहे हैं

जीवन को अनेक विकल्प


जो भी इनसे बचकर चले

उनके अधूरे रहें संकल्प


सवालों को तू सदा धार दे

मुल्क की फिजा सुधार दे


सवालों का शोर कर घना

जिंदगी को भी सफल बना


सवालों से कभी मुख न मोड़

पछताने को मौके न छोड़