सत्ता मद में सदा वक्र रहे

हैं देश के सब राजनेता


वरना भारत आज जग 

में नंबर वन ही होता


जाति मजहब के नाम

पर करते रहे सियासत


जनता को आपस में लड़ा

लूटते रहे सरकारी दौलत


समता और न्याय की देते 

रहे जनता को सदा दुहाई


पर जनता को दे नहीं पाए

नेता रुत कोई सुखदायी


गरीबी के संजाल में जकड़ी

देश की एक चौथाई आबादी


पर सरकारों के पास अब भी

सब साधन नहीं हैं बुनियादी