दुनिया में जब तब गूंजती

रही दो दोस्तों की दास्तान

भारतीय संस्कृति में भी हैं

कई लोकप्रिय आख्यान

कृष्ण सुदामा की मित्रता

सबसे भावपूर्ण मिसाल

कर्ण भी दुर्योधन के लिए

बना आजीवन बड़ा ढाल

श्रीराम से करके मित्रता

सुग्रीव को मिला अधिकार

वहीं निषादराज को मिला

प्रभु राम से अगाध प्यार

समान सोच और विचार

से ही उपजे जो अनुराग

सचमुच वही तत्व ही है

मित्रता का असल पराग

जो जीवन में कर सका

सही मित्रों का चुनाव

उसके जीवन से दूर हुए

विविध मानसिक तनाव

प्रभु की कृपा से मिलते

हैं जीवन में सच्चे मीत

सही परामर्श से छोड़ते

जो अपनी छाप अमिट