पूंजीवाद के चक्र में लिपट

गया देश का समूचा तंत्र


भुला चुका है वो पूरी तरह

पुरखों के समाजवाद के मंत्र


पूंजीवाद में आम आदमी के

लिए नहीं कोई पुरसाहाल


जो अधिकाधिक पूंजी जुटाए

बस उसकी ही बांछें लाल


पूंजीपतियों के अधीन हो गई

है देश की समूची मशीनरी


आम आदमी की तो मुश्किलें बढ़ीं

कुछ की दृष्टि पूंजी वृद्धि पर गड़ी