जीवन में हर मनुष्य को

होती है मित्र की दरकार


जिनसे बांट सके वो निज

मन की व्यथा औ उद्गार


कार्यालयों में काम के बाद

मिलते छोटे छोटे अंतराल


हर शख्स तब चाहता यही 

के मन रहे सदा खुशहाल


मन हल्का करने के लिए वो

करता साथियों संग बातचीत


विचार साम्यता के आधार पर

बन जाया करते हैं कुछ मीत


मित्रों संग विचार विमर्श से ही

मिटते हैं मन के सभी तनाव


मित्रों की पहचान में जब रह

जाती है कहीं कोई कमियाँ


तब दफ्तर की यारियां देती

मुफ्त में विविध दुश्वारियां


छोटे छोटे काम काज में भी 

जब तब टकराते हैं अहम


वे जीवन की खुशहाली छीन

सुख शांति को कर देते भसम


यारियां गांठते समय रखिये

अपनी सीमाओं की पहचान


गर गलती कुछ हो गई तो आगे

छिन जाएगा चैन और आराम