एक एक कर मिटते जा रहे
हैं अनेक सरकारी संस्थान
फिर भी चादर तानकर
सो रहा पूरा हिंदुस्तान
या तो लोग ना फहम हैं
या मुश्किलों से अंजान
इस पर भी गफलत पाले
हैं देश बन जाएगा महान
निजी क्षेत्र ने क्या क्या दिया
पूरा देश है इसका गवाह
राष्ट्रीयकृत बैंकों को उसने
कर दिया कर्जों से तबाह
किन आंकड़ों के आलोक में
दे रहे निजी क्षेत्र को बढ़ावा
क्या निजी क्षेत्र ने विस्तार में
जन हित का मार्ग अपनाया
