माँ तू तो मुझको भुला चली
गई अनंत यात्रा की ओर
मैं तो दर्द से बोझिल ही था
अब दर्द दे गई एक और
हाँ. माँ मेरी अचानक निकल
पड़ी गोलोक धाम की ओर
जाते जाते वो बिसरा गईं
ममत्व की ईश्वरीय डोर
वर्षों से हम पले बढ़े बस
उनकी आंचल की छांव
उनकी कृपा आशीर्वाद से ही
मिटते रहे औरों से मिले घाव
पांच दशक से वो ही हमारी
सदा करती रहीं देखभाल
सभी विपदाओं और विपत्ति
के समय खड़ी रहीं बन ढाल
बातों से वो मन में भरती रहीं
सतत हौसला और उत्साह
सत्य. धर्म अनुकूल आचरण
की दिखाती रहीं सदा राह
माँ तेरे बिन इस दुनिया में सही
राह चलना अब सिखाएगा कौन
मेरी गलतियों में सुधार के सही
उपाय अब समझाएगा कौन
तू इस तरह जो छोड़ गई मुझे
दुनिया में बिल्कुल अनाथ
विपदा औ गाढ़े समय में हक से
पकड़ूंगा अब मैं किसके हाथ
हे ईश्वर ! यह संदेश मेरा मांँ
तक पहुंचा देना जरूर जरूर
अगले जन्म में वो फिर मुझे
ममता की छांव देवें भरपूर


