वादा था जन कल्याण का
मग में बिछा रहे कांटे. कील
भूल गए के धरतीपुत्र ही तय
करेंगे सियासी मुस्तकबिल
संसद में प्रतिपक्ष खड़ा है
जमकर किसानों के साथ
सबको पता के धरतीपुत्र ही
है इस देश का असली नाथ
बेहतर हो सरकार शीघ्र ही
वापस ले तीनों कृषि कानून
महीनों से छीन रखा है जिनने
किसानों के दिल का सुकून
