हर लड़ाई देती है किसी देश
या समाज को बड़ा जख्म
इसे भरने के लिए उसे जुटाने
पड़ते हैं बड़ी मात्रा में मरहम
मगर सब कुछ जानते हुए भी
लोग लड़ते रहते हैं हरदम
वर्चस्व की स्थापना का भाव
ही देता है लड़ाई को न्यौता
वर्चस्व बनाए रखने को ही हर
बार लड़ता है मनु हो या देवता
विनाशक प्रवृत्ति के ही होते हैं
हर लड़ाई के वृहद परिणाम
पर मनुष्य जीत की खुशी को
ही मान लेता है अपना इनाम
हर लड़ाई के बाद छा जाती है
शांति की बड़ी चादर चहुंओर
हर व्यक्ति यह समझ लेता है कि
शांति का विकल्प नहीं कुछ और
लड़ाई के बाद बढ़ जाती है हर
तरफ पुनर्निर्माण की जद्दोजहद
आदमी को यह बात समझ में आ
जाती है कि शांति ही लाभप्रद


