निरीह जनता की कैसे निभे

मगरूर सत्ताधीशों के साथ


संकट में मझधार में छोड़कर

जो झटक रहे हैं अपने हाथ


कोरोना के संकट विस्तार से 

सहमे हैं समूचे देश के लोग


नेताओं की चिंता का केंद्र बस

सत्ता का मनमाना उपभोग


समस्याओं के झंझावात में

फंसी जनता रही है कराह


पर नेताओं की प्राथमिकता

कैसे जीतें आगामी चुनाव


सुरसा की तरह मुंह फैलाता

जा रहा है कोरोना लगातार


पर सरकारों को फिक्र बस यह

के कैसे भरें उनके कोषागार