कुर्सी के लिए वो बन

गए झूठ की मशीन


दावे भी हैं अजब गजब

काम आए न खुर्दबीन


कदम कदम पर वे चलें

इवेंट मैनेजमेंट का दाँव


सालों में एक डग भी नहीं 

आगे बढ़े शहर हों या गांव


कुछ लोगों के ही इर्द गिर्द

केंद्रित हो गई है पूरी सत्ता


सरकारों की चाल से बैठ 

रहा है लोकतंत्र का भट्ठा


जब तक हम नहीं करेंगे

सही जनप्रतिनिधि का चुनाव


तब तक लहरों में फंसी रहेगी

देश के विकास की नाव