जब जनता चुप रहती 

है सहकर कष्ट अपार


तब सरकार हो जाती

है मतिभ्रम का शिकार


पीड़ाओं का होगा जब

सही तरीके से जिक्र


तब सत्ताधीशों को होगी

उनके समाधान की फिक्र


जन सुविधाओं के लिए ही

गठित है भारी भरकम तंत्र


लेकिन वो कतई भुला बैठा 

है जन सेवा का महामंत्र


लोकतंत्र वहीं सफल जहाँ

जनता जनार्दन हो चैतन्य


हक हुकूक के लिए संघर्ष

को ही जन जन माने पुण्य