न जाने कहाँ गुम हुआ
पुलिस का इकबाल
बढ़ते अपराधों ने उठा
दिए उसपे कई सवाल
अपराधी यहाँ वहाँ कर
रहे मनमाना व्यवहार
जनता अपराधों से त्रस्त
नहीं कोई सुनता गुहार
महकमे के नाम को डुबा
रहे अफसर औ कर्मचारी
पूरे महकमे को लग गई धन
उगाही की अजब बीमारी
काम धाम सब छोड़ लगे
धनार्जन में दिन औ रात
फिर जनता को कैसे मिले
अपराधीतत्वों से निजात
