दीपों की उज्ज्वल रश्मियों

से मानवता को मिले शक्ति


हे दीप देव तुम देना जग को

भातृत्व भाव की उद्दाम वृत्ति


सबके अंतर से सब तम दूर रहे

सहयोग का भाव खूब भरपूर रहे


मन खिला खिला सा रहे सदा

ममता औ त्याग का सुरूर रहे


महसूस कर सकें सबकी पीड़ा

उठा सकें जन कल्याण का बीड़ा


आ सकें कभी एक दूजे के काम

मानवता विकसित हो अविराम