दीमकों ने खोखले कर दिए

हैं लोकतंत्र के तीनों अंग


आपद काल में उनकी दशा

देख आम आदमी बहुत दंग


रणनीति के लिहाज से सब

दिखते हैं बिल्कुल बदहाल


संसाधनों के अभाव में जनता

को असमय निगल रहा काल


बस जुमले उछाल रही सत्तारूढ़

राजनेताओं की कुटिल जमात


हकीकत यही के पल पल दरक

रहे हैं आम भारतीय के जज्बात